Posts

सुनिये, गुनिये लता की आवाज में अजय गर्ग का दाता सुन ले..मौला सुन ले

मस्तमौला अजय। बेहतरीन पत्रकार के साथ जानकार इंसान भी। जो भी करते हैं डूबकर करते हैं, दिल से करते हैं। उनकी कलम का जादू मधुर भंडारकर की आगामी फिल्म जेल में नजर आएगा। इस फिल्म में अजय के लिखे गीत दाता सुन ले...मौला सुन ले.. को वर्ष 1957 में वी.शांताराम की फिल्म 'दो आंखें बारह हाथ' में कैदियों के लिए 'ए मालिक तेरे बंदे हम..' गीत गाने वाली स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी है। इस फिल्म का गीत-संगीत पिछले दिनों रिलीज हो गया है। निर्देशक मधुर भंडारकर कहते हैं कि गीतकार अजय गर्ग के दाता सुन मौला सुन गीत की पंक्तियों को पढऩे के तुरंत बाद ही उन्होंने फैसला ले लिया था कि इसे केवल लता मंगेशकर ही गाएंगी। भंडारकर ने कहा कि गीत 'दाता सुन मौला सुन' नए जमाने का 'ए मालिक तेरे बंदे' साबित होगा। आप भी इस गीत को सुन सकते हैं-

कम से कम चम्बल का मान तो बढ़ा

रामनाथ गोयनका एक्सीलेंस इन जर्नलिज्म अवार्ड की गत दिवस घोषणा हुई, तो यह जानकार सुखद आश्चर्य हुआ कि एक लाख रुपए के प्रतिष्ठित रामनाथ गोयनका एक्सीलेंस इन जर्नलिज्म अवार्ड फॉर हिन्दी प्रिंट कैटेगरी के अंतिम तीन नामांकन में अपनेराम का भी नाम था। यह अवार्ड स्थापित पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेयी को मिला है लेकिन अपनेराम को इससे ही संतोष है कि कम से कम चम्बल के बीहड़ों से घिरे ग्वालियर शहर में पत्रकारिता करने वाले किसी पत्रकार के नाम पर इंडियन एक्सप्रेस समूह के इस सम्मानित पुरस्कार के लिए विचार किया गया। इस खबर की जानकारी लगने के बाद कई शुभचिंतकों के संदेश दूरभाष पर मिले हैं। उन सभी मित्रों का मैं तहेदिल से शुक्रिया अदा करता हूं। मेरा विश्वास है कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। पहले प्रयास को ही इतनी ऊंचाईयां मिल गईं, चम्बल के मौड़ा के लिए तो यही पुरस्कार है। दैनिक भास्कर में सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों पर काम करने की जो आजादी हासिल है उससे इन पुरस्कारों की राह और आसान हो जाती है, इसलिए थैंक्स टीम भास्कर। वैसे इसी साल की शुरुआत में मध्यप्रदेश सरकार की ओर से स्थापित पहला रतनलाल जो...

अभिषेक को कमाल तो देखो...

Image
अरे च म्बल के बीहड़न में बसे भिंड को मौड़ा है अपओ अभिषेक । कूची चलाउत-चलाउत ग्वालियर आओ और फिर वहां ते वाया इंदौर पहुंच गया जयपुर। मुंबई में आतंकी हमलों के बाद अपए अभिषेक की कूची से ऐसे जानदार-शानदार व्यंग्य निकले कि कछु पूछो मत। बिना विलंब के आपकी खिदमत में पेश है आपके मौड़ा ये कार्टून- और हां जबऊ मौका मिले तबही अपए जा मौड़ा की पीठ थपथपा दिओ, काहे कि कछु दिना पहले मौड़ा काठमांडू में साउथ एशियन कार्टून कांग्रेस में हिस्सा लेके आओ है। चंबल को मौड़ा है, तो नेपाल में नाम ही करके आओ होगो। भईया अपनेराम की जानिब अबही बधाई ले लो, चंबल के दूसरे भईयन को मैसेज तुमन तक पहुंच जागो। तब तक के लाने राम-राम।

सिंधियाजी ने क्यों नहीं डाला वोट

Image
ग्वालियर के जयविलास परिसर में जीवित सिंधिया राजवंश के महाराज ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस के कद्दावर नेता है और विधानसभा चुनाव में अपने अधिक से अधिक समर्थकों को टिकट दिलाने में उन्होंने कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। जब अपनों को टिकट दिला ही दिया, तो उन्हें जिताने के लिए भाई ज्योतिरादित्य ने गांव-देहात की भी जमकर धूल फांकी। चुनाव किसी भी स्तर का हो एक-एक वोट मायने रखता है, इसलिए वोटों के लिए उन्होंने अंचल की हर सभा में अपने परिवार और जनता से रिश्तों की जमकर दुहाई दी। दुर्भाग्य देखिए, पब्लिक को लोकतंत्र का पाठ पढ़ाने वाले सिंधिया जी ने मतदान करना तक उचित नहीं समझा। अर्थात, मतदान वाले दिन न तो वे आए और न ही उनके परिवार का कोई सदस्य। इसका सीधा मतलब यह कि इस क्षेत्र के कांग्रेस उम्मीदवार के तीन सालिड वोट हाथ से निकल गए। मतदान न करने में क्या मजबूरी रही, यह तो वो ही जाने लेकिन कहने वाले तो यहां तक कह रहे हैं कि सिंधियाजी भी और नेताओं की राह पर चल पड़े हैं? यह अलहदा है कि उनकी बुआ सांसद यशोधराराजे सिंधिया ने शिवपुरी और भाजपा के राष्ट्रीय सचिव और राजनाथ सिंह के सलाहकार प्रभात झा ने भी ग्वालियर में...

चरणभाट और कलमभाट

ताल-तलैया की नगरी से ग्वालियर आना हुआ, तो सोचा क्यों न सियासी हलचल की नजर की जाए। जब अपनों (अरे भाई वोई कलमघसीटू क्लर्क) के बीच पहुंचे तो अहसास हुआ कि पूरा निजाम ही बदला हुआ है। जब भी सियासी बयार चलती है, लोगों के चोले बदल जाते हैं। कुछ नेता गिरगिट की उपमा पाते हैं, तो कुछ सियार की। चुनाव के समय नेताओं को चरणभाटों की दरकार रहती है, जो उन्हें चंद पैसे या फिर स्वादिष्ट खाना या कपड़ों की कीमत पर सुलभ हो जाते हैं। चरणभाटों का दस्तूर राजा-महाराजाओं के जमाने का है और एक तरह से सियासतदारों के साथ जनता ने भी इन्हें स्वीकार कर लिया है लेकिन समाज की दशा-दिशा निर्धारित करन वाले कलमभाटों का चलन पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ा है। सियासत में गहरी पैठ रखने वाले कलमभाटों को देश की राजधानी या किसी बड़े नगर में फ्लैट या कार की चाबी मिलने-दिलाने की चर्चाएं कलमकारों के बीच आम रही है। अब यह बीमारी छोटे शहरों तक पहुंचकर कलम को कटघरे में खड़ा कर रही है। इस बार चुनाव में कोई मुद्दा या लहर लोगों के सिर चढ़कर नहीं बोल रही। नेताजी की छवि ही निर्णायक भूमिका में है, इसलिए अपनी छवि को चमकाने के लिए ग्वालियर-चम्ब...

हर डाल पर राज ठाकरे बैठा है........

Image
लाख टके का एक सवाल, आखिर बिहारी ही क्यों मार खाते हैं? क्या इसके लिए राज ठाकरे ही पूरी तरह से जिम्मेदार है? इन सवालों का जवाब पाने के लिए हमें कुछ मुद्दों पर विचार करना होगा। नाम जुदा हो सकते हैं पर राज ठाकरे जैसे फितरती और राष्ट्रतोड़क तत्व देश के हर क्षेत्र या प्रदेश में पाए जाते हैं। राज ठाकरे की अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा है और वे शिवसेना सुप्रीमो बालासाहेब ठाकरे की विरासत को हथियाने के लिए उत्तर भारतीयों को अपने निशाने पर लिए हुए हैं। अपनी गली में कुत्ता भी शेर होता है और यदि कोई कुत्ता अपनी गली में आए बाहरी लोगों पर भौंकता है, तो क्या गलत करता है। राज ठाकरे भी कुछ ऐसा ही कर रहे हैं। रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव को मुंबई में छठपूजा करने की चुनौती देकर और सुपरस्टार अमिताभ बच्चन को सपरिवार गरियाकर शिवसेना का यह पुराना सैनिक पहले भी धृष्टता कर चुका है। और अब रेलवे की परीक्षा देने आए बिहारियों की मारपीट के पीछे उनकी वोट बैंक की गंदी राजनीति और दूषित मानसिकता ही निहित है ।ऐसा करते समय राज ठाकरे और उनके अनुयायी यह भूल जाते हैं कि यदि देश के अन्य हिस्सों में महाराष्ट्र के लोगों को खदेड़...

राजमाता पर फिल्म के मायने

Image
ग्वालियर के सिंधि या राजवंश की आखिरी राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने लोगों के दिलों पर बरसों राज किया। राजपथ से लोकपथ का उनका यह सफर क भी रजिया सुल्तान बनी बॉलीवुड की ड्रीमगर्ल हेमा मालिनी अब परदे पर जीवंत करने जा रही हैं। 'एक थी रानी ऐसी भी' नामक फिल्म में हेमा राजमाता का किरदार निभाएंगी, तो उनके पति जीवाजीराव सिंधिया का किरदार विनोद खन्ना निभाएंगे। यह फिल्म गुलबहार सिंह के निर्देशन में बनने वाली है। इस फिल्म का मुहुर्त पिछले दिनों मुंबई में हो चुका है और जल्द ही इस फिल्म की शुटिंग शुरु हो जाएगी। त्याग, सादगी और सेवा की प्रतिमूर्ति अम्मा महाराज के जीवन पर बनने वाली इस फिल्म को लेकर लोगों की उत्सुकता स्वाभाविक है, क्योंकि ग्वालियर की यह अंतिम महारानी हमेशा ही सुर्खियों में रही। फिर चाहे बात मध्यप्रदेश की राजनीति की हो, या फिर अपने पुत्र और कांग्रेस के कद्दावर नेता माधवराव सिंधिया से उनके संबंधों की। राजमाता की भूमिका मेरा सौभाग्य-हेमा हेमा ने कहा-‘मैं बहुत खुश हूं कि राजमाता के इस किरदार को मैं परदे पर जियूंगी। मेरे लिए यह बहुत सम्मान की बात है। वह भारतीय जनता पार्टी की संस...