
अरे चम्बल के बीहड़न में बसे भिंड को मौड़ा है अपओ अभिषेक। कूची चलाउत-चलाउत ग्वालियर आओ और फिर वहां ते वाया इंदौर पहुंच गया जयपुर। मुंबई में आतंकी हमलों के बाद अपए अभिषेक की कूची से ऐसे जानदार-शानदार व्यंग्य निकले कि कछु पूछो मत। बिना विलंब के आपकी खिदमत में पेश है आपके मौड़ा ये कार्टून-और हां जबऊ मौका मिले तबही अपए जा मौड़ा की पीठ थपथपा दिओ, काहे कि कछु दिना पहले मौड़ा काठमांडू में साउथ एशियन कार्टून कांग्रेस में हिस्सा लेके आओ है। चंबल को मौड़ा है, तो नेपाल में नाम ही करके आओ होगो। भईया अपनेराम की जानिब अबही बधाई ले लो, चंबल के दूसरे भईयन को मैसेज तुमन तक पहुंच जागो। तब तक के लाने राम-राम।
7 comments:
Good hai ji
dhanyawaad manoj
अपने राम का राम-राम
जे बात तो सही है की मोडा सइमे कमल कर रओ है अरे बही करेगो भी केसे नै आखिर मोडा तो चम्बल को है. लेकिन मनोजजी जे बताओ की आप कर रए और आपके धारदार शब्द कहा हैं
लगे रहो भाई आप लोग डेमॉक्रेसी का चोथा स्तंभ हो आप लोगो से ही देश की जनता को उम्मीद है की आप लोग सच सामने लाएँगे. ग्वालियर से किसी को यहाँ देख बहुत खुशी हुई. अपनी मिट्टी की खुश्बू अलग ही होती है यहा हज़ारो मील दूर बैठ कर ही आप जान सकते है. समय मिले तो जो थोडा बहुत मैने अपने ब्लॉग मे लिखा को देखिए और अच्छा लिखने के लिए मार्गदर्शन कीजिए.
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