कौन कहता है मीडिया नख-दंतविहीन है। दैनिक हिन्दुस्तान के आगरा संस्करण ने बेईमान और ठग बिल्डरों के खिलाफ जागो आगरा अभियान शुरु किया है। पाठकों से इस सार्थक पहल का जबर्दस्त रिस्पांस मिला है।बिल्डरों ने किसी की जीवनभर की गाढ़ी कमाई लूट ली, तो किसी को अच्छे घर का सपना दिखाकर ठग लिया। हर कोई दुखी है। ट्रिपल बी (बिल्डर, ब्रोकर और बैंक) का काकस पग-पग पर लोगों को ठग रहा है लेकिन सरकारी मशीनरी गुड़ खाए बैठी है।क्या आप भी हमारा साथ देंगे? चम्बल के बीहड़ का नाम सामने आते ही आंखों के सामने घूम जाती है लंबी मूंछों और घनी दाढ़ी वाले डकैतों की तस्वीर। क्या यही है चम्बल का सच? शायद नहीं। भले ही चम्बल की माटी ने बागियों (डकैतों) को आश्रय दिया हो, लेकिन उसने ग्वालियर-चम्बल अंचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को अपने आँचल से लगाए रखा। और माटी में ऐसी तासीर जगाई कि चम्बलराइट्स को सच कहने व सुनने की हिम्मत मिल सके। यदि सच से है आपका भी वास्ता, तो चम्बल के बीहड़ में स्वागत है आपका...।
Thursday, October 21, 2010
सार्थक पहल हिन्दुस्तान की
कौन कहता है मीडिया नख-दंतविहीन है। दैनिक हिन्दुस्तान के आगरा संस्करण ने बेईमान और ठग बिल्डरों के खिलाफ जागो आगरा अभियान शुरु किया है। पाठकों से इस सार्थक पहल का जबर्दस्त रिस्पांस मिला है।बिल्डरों ने किसी की जीवनभर की गाढ़ी कमाई लूट ली, तो किसी को अच्छे घर का सपना दिखाकर ठग लिया। हर कोई दुखी है। ट्रिपल बी (बिल्डर, ब्रोकर और बैंक) का काकस पग-पग पर लोगों को ठग रहा है लेकिन सरकारी मशीनरी गुड़ खाए बैठी है।क्या आप भी हमारा साथ देंगे?
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