चम्बल के बीहड़ का नाम सामने आते ही आंखों के सामने घूम जाती है लंबी मूंछों और घनी दाढ़ी वाले डकैतों की तस्वीर। क्या यही है चम्बल का सच? शायद नहीं। भले ही चम्बल की माटी ने बागियों (डकैतों) को आश्रय दिया हो, लेकिन उसने ग्वालियर-चम्बल अंचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को अपने आँचल से लगाए रखा। और माटी में ऐसी तासीर जगाई कि चम्बलराइट्स को सच कहने व सुनने की हिम्मत मिल सके। यदि सच से है आपका भी वास्ता, तो चम्बल के बीहड़ में स्वागत है आपका...।
Thursday, February 25, 2010
सचिन, सचिन और सचिन
सचिन के बल्ले से ग्वालियर के कैप्टन रूपसिंह स्टेडियम पर निकली ऐतिहासिक पारी को कवर करने में मीडिया भी पीछे नहीं रहा। पाठकों तक सचिन का यश पहुंचाने के लिए हिन्दी और मराठी के समाचार पत्रों ने कुछ अलग अंदाज में लीक से हटकर करने का प्रयास किया।
sachin ki kirtimaan ki gawahi dene wale media ke andaz ko aapne khoob dikhaya. kya collection hai. ab lag raha hai ki Sachin aur Mumbai dono hi poore desh ki dharohar hain.
4 comments:
सचिन का जबाब नहीं.
इन क्रिकेटरों ने देश को दिया क्या है
sachin ki kirtimaan ki gawahi dene wale media ke andaz ko aapne khoob dikhaya. kya collection hai. ab lag raha hai ki Sachin aur Mumbai dono hi poore desh ki dharohar hain.
आपकी प्रस्तुति ने सबकुछ कह दिया...
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